BHARTENDU SINGH

US navy

US Warns India about Chinese Spy Balloon !

Hello and I welcome you all to hinditechguru.net . Recently USA has actually warned India about a very serious Chinese spy mission . The United State government official has told India about the Chinese spy balloon that was in news recently . I am sure you must have heard about it a million times by now .

USA recovers balloon debris ?

The Chinese spy balloon , US navy actually released the picture of drowned Chinese spy balloon . The Chinese spy balloon entered the United Stated of America a few weeks ago . And it floated over the US , until the United States government decided that its time to shoot down this down . They shot this balloon down by a F-22 Raptor , a very advance fighter jet .

USA warned to the world ?

According to USA , this was not a one off case . This has been happening for years now . And US has warned a total of 40 nations that look , what happened to us has been happening to you as well and it will happen in the future . They also added further that countries need to be prepared . Countries need to stand up to Chinese aggression .

As these Chinese spy balloons that violate the countries territorial integrity , they simply will not be accepted . US even claimed that this Chinese balloon is actually a part of a vast surveillance program . The Chinese government has been conducting this humongous aerial surveillance program , where other than using satellite to spy on nations , they are also using these so called weather balloons .

Has India also been spied ?

While warning the 40 nations , US has mentioned primarily five nations that are the top most targets of the Chinese Air Force . According to US these Chinese spy balloons are a part of a surveillance program operated by People’s Liberation Air Force . Their primary targets are India , Japan , Vietnam , Taiwan and the Philippines .

What if spy balloon floats on India ?

If this happens to India , then it will not be easy for India to do what US did . Not just because we do not want to anger China . It is also because Russia , a very important partner of India has openly criticized the US action against the Chinese balloon . The Russian government has said that the US reaction of using an F-22 raptor against a Chinese spy balloon was rather hysterical and the Chinese side rather acted responsibly in this manner .

So suppose if tomorrow India does the same thing , Russian probable won’t be backing India and the current Indian government will be facing a lot of pressure internally to act against the Chinese balloon if such a case ever happens . So again this balloon drowning incident is indeed a defining moment . No matter how much China tries to play it down , this is a defining moment . And in the future actions of major players in the geopolitical arena might get influenced by what US did few days ago .

unified health interface

यूनीफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) क्या है | How will it revolutionize India

भारत में UPI ने पैसे के लेन देन में पूरी तरह से क्रांति ला दी है . अब भारत सरकार इसी की तर्ज पर UHI को लांच करने जा रही है . जिससे पूरे भारत के हेल्थ सेक्टर में क्रांति आ जाएगी . ये सभी काम डिजिटल इंडिया के अंतर्गत आते है . इन सभी प्रोजेक्ट का काम है , भारत को पूरी तरह से डिजिटल बना देना . इसी से सम्बन्धित राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ आर.एस. शर्मा ने यह जानकारी दी है , की यूनीफाइड हेल्थ इंटरफेस (UHI) इस हफ्ते से शुरू हो जाएगा . 

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (National Digital Health Mission – NDHM) क्या है ?

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM) एक कम्पलीट डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम है , जिसके चार प्रमुख बिंदु हैं . ये चार प्रमुख बिंदु है – स्वास्थ्य आईडी, डिजी डॉक्टर, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड और स्वास्थ्य सुविधा रजिस्ट्री . बाद में इसके अंतर्गत बाकि सुविधाओं को भी जोड़ा जायेगा . उधाहरण के लिए ई-फार्मेसी और टेलीमेडिसिन सेवाओं को भी जोड़ा जायेगा . इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority (NHA) द्वारा लागू किया जाएगा । 

UHI क्या है ?

UHI का full form ‘यूनिफाइड हेल्थ इंटरफ़ेस‘ है . डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य के लिए मुक्‍त और अंतर-संचालित आईटी नेटवर्क तैयार किया गया है, जिसे यूनीफाइड हेल्‍थ इंटरफेस – यूएचआई का नाम दिया गया है. यह राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत काम करेगा . इसके साथ ही साथ ये प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के समाधान भी ढूँढने में मददगार साबित होगा .

UPI की तरह सफल होगा UHI ?

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ आर.एस. शर्मा ने बताया की “उन्हें उम्मीद है कि यूएचआई, यूपीआई (यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस) की तरह ही सफल होगा”। ऐसा ही कुछ मानना बहुत से बुद्धिजीवियों का भी है . क्यूंकि UHI भारत के हर एक इंसान की ज़िन्दगी को बेहतर और आसान बनाने की क्षमता रखता है . इससे मेड टेक और फिन टेक कंपनियों के क्षेत्र क्रांति आएगी . इसके साथ ही इस क्षेत्र से भी बहुत से यूनिकॉर्न स्टार्टअप निकलेंगे . जिससे देश में रोजगार भी पैदा होगा .

UHI से क्या फायेदा होगा ?

  • UHI की मदद से सभी मरीज अपने अनुसार किसी भी डॉक्टर से मिल सकेंगे .
  • इसकी मदद से किसी भी डॉक्टर को मरीज की मेडिकल हिस्ट्री जानने में आसानी होगी .
  • UHI की मदद से सभी सुविधाएं एक ही प्लेटफार्म पर मिल सकेंगी . उधाहरण के लिए एम्बुलेंस की सेवा इत्यादि .
  • इसकी मदद से भारत सरकार भविष्य में फी असरदार स्कीम लांच कर पाएंगी . 
  • UHI की मदद से मरीज आराम से अपनी मेडिकल इन्शुरन्स को क्लेम कर पाएंगे .

मैं आशा करता हूँ की आपको इस आर्टिकल से काफी कुछ सीखने को मिला होगा . यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके बताएं .

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digital rupee

भारत में लॉन्च हुआ digital rupee | RBI digital rupee launch

देश के केंद्रीय बैंक “रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया” ने देश की पहली डिजिटल करेंसी (डिजिटल रुपया) को एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लांच कर दिया है . RBI ने फ़िलहाल होलसेल ट्रांजैक्शन (e₹-W) की शुरुआत की है . इसके एक महीने के अन्दर रिटेल सेगमेंट (e₹-R) को कुछ चुनिन्दा जगह में शुरू करने की योजना है . अभी होलसेल ट्रांजैक्शन (e₹-W) के लिए नौ बैंकों को चुना गया है .

CBDC क्या है ?

सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को CBDC भी कहा जाता है . यह रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी कानूनी धन का डिजिटल रूप है . यह एक तरह की fiat मनी है , जिसे भारत सरकार द्वारा लांच किया गया है . इसे आसान शब्दों में इलेक्ट्रॉनिक मनी भी कहा जाता है .

RBI का कहना है की , “CBDC डिजिटल रूप में एक केंद्रीय बैंक द्वारा जारी कानूनी टेंडर है. यह फिएट मुद्रा के समान है और फिएट करेंसी के साथ इसे वन-ऑन-वन एक्सचेंज किया जा सकता है”.

डिजिटल रूपए होने के फायदे ?

  1. डिजिटल रूपए के लांच होने के बाद , आप कैश के बिना भी काम कर सकते है .
  2. क्रिप्टोकरेंसी के सारे फीचर इस डिजिटल करेंसी में मौजूद होंगे .
  3.  डिजिटल रूपए में कैश की तरह वियर , टेअर या जलने की सम्भावना भी नही होती है .
  4. डिजिटल करेंसी को ट्रैक भी किया जा सकता है . जबकि क्रिप्टो करेंसी में कोई भी ऐसी सुविधा नही है .
  5. डिजिटल करेंसी के पीछे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की गारंटी है . जबकि क्रिप्टो के केस में ऐसा कुछ भी नही है .

किस बजट सत्र में हुआ था ऐलान ?

बजट सत्र 2022-23 में सरकार के द्वारा ऐलान किया गया था , की सरकार क्रिप्टो करेंसी की तरह ही एक डिजिटल करेंसी इस साल के अंत तक ले कर आएगी . यह fiat मनी की तरह होगा , जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा रेगुलेट किया जायेगा . आरबीआई ने 31 अक्टूबर 2022 को अपने जारी किये गए बयान में कहा की “डिजिटल रुपये का पहला पायलट प्रोजेक्ट होलसेल ट्रांजैक्शन (e₹-W) एक नवंबर को शुरू होगा. इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत सरकारी सिक्योरिटीज में सेकेंडरी मार्केट ट्रांजेक्शन का निपटान किया जाएगा” .

रिटेल सेगमेंट (e₹-R) और होलसेल सेगमेंट (e₹-W) में क्या अंतर है ?

डिजिटल रुपया दो सेगमेंट में आएगा एक रिटेल सेगमेंट (e₹-R) और दूसरा होलसेल सेगमेंट (e₹-W) . रिटेल सेगमेंट (e₹-R) वो होता है , जिसमे आम नागरिक किसी भी शॉप पर कुछ भी परचेस करने के लिए e-rupee (डिजिटल रुपया) का इस्तेमाल कर सकता है . इसमें कस्टमर और मर्चेंट के बीच में डिजिटल रुपया की मदद से ट्रांजैक्शन किया जायेगा .

होलसेल सेगमेंट (e₹-W) में देश के बैंक सरकारी सिक्योरिटीज के सेटलमेंट के लिए डिजिटल रुपया का इस्तेमाल करेंगी . इसके तहत जो पायलट प्रोजेक्ट लांच किया गया है , उसमे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा देश भर के नौ बैंक का चयन किया गया है . इन बैंकों की पहचान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचएसबीसी बैंक , यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक , और यस बैंक के रूप में की गई है.

FAQ

Q. डिजिटल रुपया कितने सेगमेंट में लांच किया जायेगा ?

Ans. डिजिटल रुपया को दो सेगमेंट में लांच किया जायेगा . एक रिटेल सेगमेंट (e₹-R) और दूसरा होलसेल सेगमेंट (e₹-W) होगा .

Q. रिटेल सेगमेंट कब लांच किया जायेगा ?

Ans. रिटेल सेगमेंट (e₹-R) को पायलट प्रोजेक्ट के तहत एक महीने के अन्दर लांच किया जायेगा . अभी सिर्फ होलसेल सेगमेंट (e₹-W) को पायलट प्रोजेक्ट के तहत लांच किया गया है .

Q. पायलट प्रोजेक्ट क्या होता है ?

Ans. पायलट प्रोजेक्ट किसी भी नए कार्य का एक प्रारंभिक प्रयोग होता है। जिसमें यह देखा जाता है , कि यह परियोजना एक छोटे स्तर पर कितनी असरदार साबित होती है .

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल से जुड़े सभी सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे . यदि फिर आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके या contact us में जाकर बता सकते है .

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Kavach Technology image with captions

कवच कैसे काम करता है | What is Kavach Technology

बजट सत्र 2022-23 में भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश को अलग अलग सौगात दी । इसी सत्र में उन्होंने 2022 का भारतीय रेलवे बजट भी पेश किया , जिसमे उन्होंने रेलवे को बहुत सारी सौगात दी । इसमें उन्होंने घोषणा कि की अगले 3 सालों में देश में 400 नई वन्दे भारत ट्रेन चलाई जाएँगी । इसके साथ की उन्होंने बताया की भारतीय रेलवे की यात्रा को सुरक्षति बनाने के लिए कवच तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा ।

कवच तकनीक क्या है ?

कवच तकनीक एक एंटी-कोलिजन डिवाइस है , जो की दो ट्रेनों की टक्कर को रोकने में मदद करता है । उन्होंने बताया की सरकार कवच तकनीक को लागू करने के प्लान पर काम कर रही है । इससे लगभग 2000 किलोमीटर के रेलवे ट्रैक को सुरक्षित बनाया जाएगा , जिससे भारतीये रेलवे ज़्यादा सुरक्षित हो पायेगा । यह एक स्वदेशी तकनीक है , जिससे रेलवे की स्पीड भी बढ़ेगी और वह बेहद सुरक्षित भी हो पायेगा । यह तकनीक भारत को रेलवे यात्रा में जीरो एक्सीडेंट के गोल को प्राप्त करने में मददगार साबित होगा ।

कवच तकनीक काम कैसे करता है ?

कवच तकनीक ट्रेनों की टक्कर को रोकने में मदद करता है । कवच तकनीक इस तरह से काम करता है , की अगर कोई भी दो ट्रेन एक ही ट्रैक पर एक निश्चित दूरी में आमने सामने आ जाती है । तो कवच तकनीक की मदद से अपने आप ट्रेन में ब्रेक लग जाता है और ट्रेन टक्कर होने से पहले रुक जाती है । इसके साथ ही यदि इसमें ट्रेन में कोई मैन्युअल एरर भी आ जाता है तो ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाता है ।

कवच तकनीक में जीपीएस , माइक्रो प्रोसेसर और रेडियो कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है । इसके बाद कवच तकनीक को ट्रेन के ऊपर लगाया जाता है । फिर डिवाइस को उपग्रह की मदद से इनपुट प्राप्त होते है और सभी डिवाइस आपस में मॉडेम की मदद से कम्यूनिकेट करते है । जिसके बाद जैसे ही एक निश्चित दूरी के अन्दर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेने आती है , तभी आटोमेटिक ब्रेक लग जाता है ।

कवच तकनीक के फायदे ?

कवच तकनीक के बहुत सारें फायदे :

  1. कवच तकनीक से रेलवे की स्पीड बढ़ेगी ।
  2. कवच तकनीक से रेलवे यात्रा ज़्यादा सुरक्षित हो पायेगी ।
  3. कवच तकनीक की गलत होने की गुंजाइश दस हज़ार साल में एक बार है ।
  4. कवच तकनीक इंसानी गलतियों से होने वाली दुर्घटना से भी बचाता है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको काफी कुछ नया सीखने को मिला होगा । इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको आपके सभी सवालों के जवाब मिल गए होंगे । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रह जाता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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E-Passport and nirmala sitaraman image with capiton

E-Passport क्या है और कब से जारी होगा | What is E-Passport and How it works

भारत सरकार डिजिटल भारत पर बहुत जोर दे रही है । इसी कड़ी में अब भारत के पासपोर्ट को भी डिजिटल किया जायेगा । इसका ऐलान भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र 2022 में किया , की साल के अंत से भारत में चिप इनेबल्ड पासपोर्ट इशू होंगे । तो चलिए इससे जुड़े सभी पहलुओ के बारें में विस्तार से जानते है ।

पासपोर्ट क्या होता है ?

पासपोर्ट सरकारी दस्तावेज़ होता है , जिससे व्यक्ति की पहचान होती है । भारतीय पासपोर्ट को भारत सरकार द्वारा पासपोर्ट एक्ट 1967 के तहत जारी किया जाता है । पासपोर्ट अपने धारक को अपने संरक्षण में विदेश आने जाने में मदद करता है । पासपोर्ट एक ऐसा दस्तावेज़ है , जो की अपने धारक की व्यक्तिगत पहचान और राष्ट्रीयता को प्रमाणित करता है ।

E-Passport क्या है ?

E-Passport का full form “Electronic Passport” होता है । यह सामान्य पासपोर्ट का डिजिटल रूप होता है , जिसमे एक chip लगी रहती है । इस chip के अन्दर सारा data मौजूद होता है , जिससे यह पासपोर्ट सिक्योर और टाइम एफ्फिसिएंट बन जाता है ।

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र 2022 में बताया की साल 2022-23 में भारत सरकार द्वारा ई-पासपोर्ट जारी किये जायेंगे । इसके साथ ही उन्होंने बताया की इस पासपोर्ट में चिप लगा होगा और यह चिप डाटा से जुडी सिक्यूरिटी को बेहतर करने में मददगार साबित होगा । साथ ही इस chip की वजह से नागरिको को इमीग्रेशन के लिए लम्बी लाइन में नही लगना होगा ।

E-Passport कैसे काम करेगा ?

E-Passport में इनबिल्ट चिप लगा रहता है , जिसमे बायोमेट्रिक डाटा सेव रहेगा । भारत सरकार के मुताबिक यह चिप इनेबल्ड पासपोर्ट रहेगा , जो की बायोमेट्रिक डाटा से सिक्योर्ड रहेंगे । यह पासपोर्ट फर्जिवारे को रोकने में सक्षम होंगे । इसके साथ ही अगर कोई पासपोर्ट के साथ छेड़छाड़ करता हैं , तो इनबिल्ट सिस्टम इसका पता कर लेता है , और फिर इसका वेरिफिकेशन एअरपोर्ट पर फ़ैल हो जाता है ।

ई-पासपोर्ट के फायदे ?

भारत सरकार इसको लाने जा रही है , इसका मतलब इसके ज़रूर बहुत से फायदे होते है । तो चलिए ई-पासपोर्ट के फायदे जानते है :

  1. E-Passport पुराने पासपोर्ट से ज़्यादा सिक्योर्ड है , क्यूंकि ये बायोमेट्रिक डाटा से सुरक्षित रहेगा ।
  2. E-Passport फ्रॉड , जालसाजी और आइडेंटिटी चोरी को रोकने में मदद करेगा ।
  3. E-Passport चिप रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक की मदद से अनधिकृत डाटा को रोकने में मदद करता है ।
  4. E-Passport टाइम बचाने में मदद करता है , क्यूंकि आपको लम्बी लाइनों से छुटकारा मिल जाता है ।
  5. E-Passport में 64kb का स्पेस होगा , जिसमे आप अपना डाटा सेव करेंगे । यह पासपोर्ट अन्तराष्ट्रीय मानक का होगा ।

ई-पासपोर्ट कब से जारी होगा ?

बजट सत्र 2022 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया की e-passport को साल 2022 के अंत तक इशू होना शुरू हो जायेगा । वही e-passport को पहले ही विदेश मंत्रालय के ओफ्फिसिअल्स और बाकि भारत सरकार में काम कर रहे ऑफिसियल को जारी किया जा चूका है । यह अभी तक काफी सफल भी रहा है । भारत से पहले इस तरह के ई-पासपोर्ट की सुविधा अमेरिका , जर्मनी जैसे देशो भी इस्तेमाल किया जा रहा है ।

बायोमेट्रिक डाटा क्या होता है ?

हम काफी देर से बायोमेट्रिक डाटा की बात कर रहे है , जिससे ई-पासपोर्ट काफी ज़्यादा सुरक्षित हो जाता है । मगर आखिर यह बायोमेट्रिक डाटा क्या है ? तो असल में पासपोर्ट के मामले में बायोमेट्रिक डाटा का मतलब है की आपके उँगलियों के प्रिंट्स पहले से चिप में स्टोर होंगी । जिससे आपका एअरपोर्ट पर आपका वेरिफिकेशन टाइम बचेगा और आपका पासपोर्ट सुरक्षित भी रहेगा ।

FAQ

  • Q. दुनिया का पहला पासपोर्ट किस देश ने जारी किया था ।

    Ans. दुनिया का पहला ई-पासपोर्ट मलेशिया ने जारी किया था । मलेशिया ने इसे साल 1998 में ही जारी कर दिया था ।

  • Q. भारत में सबसे पहले ई पासपोर्ट किन को मिला ?

    Ans. भारत द्वारा जारी किया गया ई-पासपोर्ट सबसे पहले प्रतिभा पाटेल को साल 2008 में जारी किया गया था । प्रतिभा पाटेल उस समय की तत्कालीन प्रेसिडेंट थी ।

  • Q.  हाल ही में किस देश ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में पहली बार ई-पासपोर्ट सुविधा आरंभ की ?

    Ans. बांग्लादेश ने हाल ही में ई-पासपोर्ट की सुविधा शुरू की है । इसके साथ ही वह दक्षिण एशिया क्षेत्र में ऐसा करने वाला पहला देश बन गया है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद काफी कुछ नया सीखने को मिला होगा । इस आर्टिकल से आपको आपके काफी सारें सवालों के जवाब मिल जायेंगे । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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Cryptocurrency पर लगेगा टैक्स | Tax on Cryptocurrency in India

आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र 2022-23 के बजट में डिजिटल असेट पर टैक्स का ऐलान कर दिया । जिसके बाद से क्रिप्टो में निवेश करने वाले काफी चिंता में है , और उनके मन में तरह तरह के सवाल उठ रहे है । तो चलिए इससे जुड़े सभी पहलू के बारें में जानते है ।

Cryptocurrency क्या होता है ?

Cryptocurrency दो शब्दों से मिलकर बना है , पहला शब्द “Cryptography” और दूसरा शब्द “Currency” है । आसान भाषा में समझे तो क्रिप्टोकोर्रेंसी एक डिजिटल फॉर्म ऑफ़ कॅश है । इसके डिजिटल होने के कारण ना ही आप इसे छू सकते है और ना ही महसूस कर सकते है , क्यूंकि cryptocurrency फिजिकली एक्सिस्ट ही नहीं करता है ।

क्या Cryptocurrency पर टैक्स लगेगा ?

भारत सरकार ने 2022-23 बजट सत्र के दौरान बताया की अब सभी डिजिटल असेट पर सर्वाधिक 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा । अगर डिजिटल असेट की बात करें तो इसमें cryptocurrency और NFT भी आते है । जिसके कारण इन डिजिटल करेंसी पर भी 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा । इसके साथ ही क्रिप्टो को गिफ्ट के रूप में देने पर भी टैक्स लगेगा ।

इसे कैलकुलेट इस तरह से किया जायेगा , की अगर आपने क्रिप्टो में 90 रूपए निवेश किये । आपके निवेश किये हुए रूपए की वैल्यू 100 रूपए होगी , तो आपके इसपर 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा । वही अगर कोई cryptocurrency को गिफ्ट में देता है , तो इसमें उपहार देने वालें को टैक्स चुकाना होगा । इसके साथ ही वर्चुअल डिजिटल असेट से नुकसान होने पर उसे अन्य आय में समायोजित नही किया जा सकेगा ।

क्या cryptocurrency भारत में लीगल है ?

बजट सत्र में सरकार द्वारा 30 प्रतिशत टैक्स लगाने के फैसले के बाद सभी को अनुमान था की cryptocurrency अब भारत सरकार ने क्रिप्टो को लीगलाइज कर दिया है । मगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र के बाद प्रेस कांफ्रेंस में बताया की , किसी भी करेंसी को तब तक करेंसी नहीं माना जा सकता है जब तक उसे सेंट्रल बैंक ने जारी नही किया गया हो । इसके साथ ही उन्होंने कहा की सेंट्रल बैंक के फ्रेमवर्क से बाहर जो भी cryptocurrency है , वो करेंसी नहीं है ।

भारत की अपनी डिजिटल करेंसी ?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र 2022-23 के दौरान बताया की भारतीय रिज़र्व बैंक साल 2022 के अंत तक अपनी खुद की डिजिटल करेंसी लांच करेगी , जो की blockchain technology पर बेस्ड होगा । वही पिछले साल जुलाई में RBI ने कहा था की वह अपनी खुद की डिजिटल करेंसी पर काम कर रही है । इस करेंसी का नाम ” सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी ” (CDBC) रखा जायेगा । यह डिजिटल करेंसी fiat करेंसी की तरह ही होगी , जिसे fiat करेंसी के साथ एक्सचेंज भी किया जा सकेगा ।

FAQ

Q. cryptocurrency पर कितने प्रतिशत टैक्स लगेगा ?

Ans. cryptocurrency या किसी और डिजिटल असेट पर सर्वाधिक 30 प्रतिशत टैक्स लगेगा ।

Q. कब से लागू होंगे नए टैक्स कानून ?

Ans. ये सभी टैक्स बजट की मोहर लगने के बाद 1 अप्रैल 2022 से लागू होंगे ।

Q. डिजिटल असेट क्या होता है ?

Ans. वो सभी टोकन जो सेंटल बैंक के फ्रेमवर्क में नहीं है , उसे डिजिटल असेट कहा जाता है । उदहारण के लिए cryptocurrency , NFT इत्यादि इसके दायरे में आते है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको काफी नयी जानकारी मिली होगी । इसके साथ ही आपको आपके सभी सवालों के जवाब भी मिल गए होंगे । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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अब मेड इन इंडिया होगा Operating System | Government plans made in India OS

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हम जितने भी डिवाइस इस्तेमाल करते है उनमें से ज्यादातर डिवाइस में android या iOS ऑपरेटिंग सिस्टम ही होता है । इन दोनों ने मिलकर 99 प्रतिशत से ज़्यादा का मार्किट कैप्चर कर रखा है । मगर अब ये स्थिति बहुत ही जल्द बदलने वाली है । क्यूंकि अब मेड इन इंडिया ऑपरेटिंग सिस्टम आने वाला है , जो एंड्राइड और iOS दोनों को कड़ी टक्कर देगा । तो चलिए इसके बारें में विस्तार से जानते है ।

Operating System (OS) क्या होता है ?

Operating System एक सॉफ्टवेयर होता है , जो computer के हार्डवेयर कॉम्पोनेन्ट और user के बीच में इंटरफ़ेस का काम करता है । इसे OS के नाम से भी जाना जाता है । OS user को computer से कम्यूनिकेट करने में मदद करता है , बिना computer की भाषा जाने । बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के किसी भी कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस को चलाना असम्भव है ।

मेड इन इंडिया होगा Operating System ?

अब तक हम सभी वही स्मार्टफोंस इस्तेमाल करते है , जिनमे एंड्राइड या तो iOS ऑपरेटिंग सिस्टम होता है । मगर अब भारत सरकार बहुत ही जल्द मेड इन इंडिया ऑपरेटिंग सिस्टम लाने वाली है , जो की परफॉरमेंस के मामले में एंड्राइड और iOS को टक्कर देगा ।

इसकी जानकारी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर ने दी है , वे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत है . उन्होंने बताया की सरकार नए ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम कर रही है , जो की पूरी तरह से मेड इन इंडिया होगा । ये ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने में मदद करेगा ,जो की शिक्षा और स्टार्टअप के क्षेत्र में काफी मददगार साबित होगा ।

भारतीय OS की ज़रुरत क्यूँ है ?

पूरी दुनिया भर में अलग अलग देशो की सरकारों और इंडस्ट्री का मानना है की पुरे internet इकोसिस्टम पर कुछ ही कंपनियों का दबदबा है । उदाहरण के लिए पूरे दुनिया भर में जितने स्मार्टफोंस इस्तेमाल होते है , उसमे से 99 प्रतिशत से ज़्यादा में सिर्फ गूगल का एंड्राइड और एप्पल का iOS ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल होता है ।

इसी स्तिथि को बदलने के लिए और मेड इन इंडिया को बढावा देने के लिए भारत सरकार खुद का ऑपरेटिंग सिस्टम लाने वाली है । यह ऑपरेटिंग सिस्टम परफॉरमेंस और फीचर के मामले में android और iOS दोनों को टक्कर देगा । इसके साथ ही ये ज़्यादा सिक्योर भी रहेगा , क्यूंकि इसके data सेंटर्स भारत में ही होंगे ।

OS का मार्किट शेयर क्या है ?

OS के मार्किट शेयर की बात करें तो , पूरी दुनिया में जितने मोबाइल बनते है , उनमे से 70 प्रतिशत स्मार्ट फोंस में एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम होता है । और 29 प्रतिशत में iOS ऑपरेटिंग सिस्टम होता है और 1 प्रतिशत में बाकि के ऑपरेटिंग सिस्टम होते है । वही अगर भारत की बात करें तो , 95 प्रतिशत स्मार्ट फोंस में एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम होता है और बाकि 4 प्रतिशत में iOS होता है । इसके बाद जो 1 प्रतिशत बचता है , उसमे बाकि के ऑपरेटिंग सिस्टम आते है ।

क्या भारतीय OS सफल होगा ?

भारत सरकार जिस ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम कर रही है , वो सफल होगा या नही ये तो इसके लांच होने के बाद ही कहा जा सकता है । वही इस फील्ड की बात करे तो अभी गूगल और एप्पल जैसी कंपनियां ही सिर्फ स्मार्ट फोंस ऑपरेटिंग सिस्टम के मार्किट पर कब्ज़ा करके बैठी है । वही इनसे कम्पटीशन की बात करें तो , माइक्रोसॉफ्ट पहले भी अपना स्मार्ट phone ऑपरेटिंग सिस्टम उतार चूका है , जो की बाद में फ़ैल हो गया था ।

इसके साथ ही जब अमेरिका की सरकार ने चाइना की company Huawei पर बैन लगया था , जिसके बाद गूगल ने अपना एंड्राइड सपोर्ट देना बंद कर दिया था । जिसके बाद से Huawei का ग्लोबल मार्किट शेयर 17 प्रतिशत से भी ज़्यादा गिर चूका है । इन सबको देखते हुए सरकार के लिए इतना आसान नही होगा एंड्राइड और iOS को टक्कर देना । मगर भारत सरकार द्वारा बनाया गया ऑपरेटिंग सिस्टम चलता है या नही , यह तो उसके लांच होने के बाद ही बताया जा सकता है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल को पढने के बाद आपको काफी नई जानकारी प्राप्त हुई होगी । इसके साथ ही आपको काफी कुछ नया सीखने को मिलेगा । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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UPI digital money transfer with caption

बिना इंटरनेट UPI पेमेंट कैसे करें | How to UPI without Internet

आज हम डिजिटल ज़माने में रह रहे है । जहाँ सोशल मीडिया से लेकर पेमेंट सर्विसेज सभी ऑनलाइन हो गयी है । भारत सरकार भी डिजिटल पेमेंट को काफी ज़्यादा प्रमोट कर रही है । जिसके कारण आज भारत में बहुत बड़ा वर्ग डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल कर रहा है । मगर भारत में आज भी एक बहुत बड़ा वर्ग है , जिसके पास इंटरनेट की सेवा उपलब्ध नहीं है । भारत सरकार इसी बात को समझते हुए एक ऐसे पेमेंट सर्विस काम कर रही है । जिसमे बिना इंटरनेट सेवा के भी , UPI की मदद से पैसे digitally ट्रांसफर किया जा सकेगा ।

UPI क्या है ?

UPI एक इंस्टेंट रियल टाइम पेमेंट सिस्टम है , जिसे National Payment Corporation of India द्वारा डेवेलोप किया गया है । इसे Reserve Bank of India द्वारा रेगुलेट किया जाता है । ये आपको तुरंत ऑनलाइन प्लेटफार्म की मदद से इंटर बैंक पैसे ट्रांसफर करने की फैसिलिटी देता है ।

UPI काम कैसे करता है ?

UPI IMPS(Immediate Payment Service System) का इस्तेमाल करता है । ये सर्विस 24 घंटे और 7 दिन लगातार चलती रहती है , इसीलिए आप UPI की मदद से किसी भी दिन या किसी भी समय पेमेंट कर सकते है । पहले के समय अगर आपको किसी को ऑनलाइन पेमेंट करना होता था , तो आपको उसके लिए उस व्यक्ति का अकाउंट नंबर , अकाउंट टाइप , IFSC कोड , बैंक नाम जैसी डिटेल्स भरनी पड़ती थी । जो की एक काफी थका देने वाला प्रोसेस है ।

मगर UPI का इस्तेमाल करके आप इन सभी झंझट से बच सकते है । UPI की मदद से पैसे ट्रांसफर करने के लिए आपको बस यूजर का आधार कार्ड या मोबाइल नंबर या वर्चुअल पेमेंट एड्रेस की ज़रुरत पड़ेगी , और बस इसकी मदद से ही आप किसी भी यूजर के अकाउंट में ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर पाएंगे ।

बिना इंटरनेट UPI पेमेंट कैसे करें ?

National Payment Corporation of India एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रही है । जिसमे आप Unified Payment Interface का इस्तेमाल करके बिना internet की मदद से डिजिटल पेमेंट कर पाएंगे । इसमें UPI Lite नाम का सामधान इस्तेमाल किया जायेगा , जिसमे बिना इंटरनेट के भी 200 रूपए तक का डिजिटल पेमेंट किया जा सकेगा । ये सर्विस मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रो में इस्तेमाल की जाएगी , ताकि लोग बिना नेटवर्क के भी डिजिटल पेमेंट कर सके ।

इसकी अनुमति भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 5 जनवरी को दी गयी है । जिसके ज़रिये लोग 200 रूपए तक का डिजिटल पेमेंट बिना इंटरनेट के कर पाएंगे । अभी भी ग्रामीण क्षेत्र में 50 प्रतिशत से अधिक लोग फीचर फ़ोन का इस्तेमाल करते है । इन फीचर फ़ोन में बिना इंटरनेट डिजिटल पेमेंट करने में UPI Lite का इस्तेमाल किया जायेगा । इन फीचर्स को प्रभावी बनाने के लिए अभी अभी टेस्टिंग चल रही है । इसमें दो समाधानों का प्रयोग किया जायेगा , जिसमे पहला तरीका “Sim Overlay” का है । दूसरा तरीका “सॉफ्टवेयर प्रावधान” समाधान है , जिसमे over the air (OTA) का लाभ उठाया जायेगा ।

Sim Overlay क्या है ?

सिम ओवरले एक ऐसी तकनीक है , जिसमे फ़ोन के सिम की फंक्शनलिटी को बढ़ाया जाता है । जिसकी मदद से फिर डिजिटल पेमेंट और बाकि सर्विसेज बिना इंटरनेट के उपलब्धता के भी किया जा सकेगा ।

ओवर द एयर (OTA) सलूशन क्या है ?

OTA समाधान को सीधे DEVICE फर्मवेयर तक पहुंचाया जायेगा । OTA समाधान फीचर फ़ोन पर सांप वाला गेम खेलने के सामान होगा । ये बिना 3G या 4G इंटरनेट सेवा के भी अपडेट प्राप्त करेगा । हालांकि ये तरीका पहले वाले तरीको से काफी अलग होगा , जिसे अभी पेटेंट के लिए भेजा गया है ।

सिम ओवरले कैसे काम करेगा ?

सिम ओवरले के ज़रिये डिजिटल ट्रांसक्शन करने के लिए टेलीकॉम नेटवर्क की मदद ली जाएगी । इसमें टेलीकॉम प्रोवाइडर के ज़रिये ही sim में overlay को एम्बेड किया जायेगा । उपभोगता को इस सिस्टम को अपने फ़ोन में नज़दीकी स्टोर में जा कर डेप्लॉय करवाना होगा । इसके बाद “Virtual Payment Address” जिसे हम UPI ID के नाम से भी जानते है । उसे हमें sms के ज़रिये बनवाना होगा । जैसे ही UPI ID बन जाती है , इसके बाद भुगतानकर्ता को उस कांटेक्ट का चयन करना होगा जिसे वो पेमेंट करना चाहता है । जिसे पेमेंट प्राप्त करना है अगर उसके पास भी UPI ID है । तो भुगतानकर्ता को सिर्फ उसके नाम पर क्लिक करना होगा । फिर जितनी राशि भेजनी है , उसे दर्ज करना होगा । इसके बाद बस पैसे सेंड क्र देने होंगे । ये सारी प्रक्रिया इंटरनेट के बजाये sms नेटवर्क पर चलेगी , जिसके कारण इसमे बिना इंटरनेट के भी डिजिटल पेमेंट किया जा सकेगा ।

FAQ

Q. UPI का फुल फॉर्म क्या है ?

Ans. UPI का फुल फॉर्म “Unified Payment Interface” है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको काफी कुछ नया सीखने को मिला होगा । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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Metaverse क्या है और कैसे invest करें | What is Metaverse and How to invest

अगर मैं आप से कहू की आने वाले समय में लोग अपने कमरे में बैठे दूर अपने किसी रिश्तेदार , दोस्त इत्यादि से मिलेंगे उनके साथ घूमेंगे , फिरेंगे , खेलेंगे , कूदेंगे इत्यादि । तो आप लोगों में से बहुत को इस बात पर विश्वास नहीं होगा और यही से metaverse का कांसेप्ट आता है । मेटावर्स को लोग web3.0 कह रहे है , क्यूंकि ये इंटरनेट से आगे की दुनिया है । जिसमे आप वर्चुअल वर्ल्ड में भी वो सब कर पाएंगे जो आप रियल वर्ल्ड में करते है । वो भी अपने घर के एक छोटे से कमरे से बैठे बैठे । तो चलिए आज हम इसी metaverse के बारें में जानेगे , की metaverse क्या है , ये कैसे काम करेगा , मेटावर्स में कैसे इन्वेस्ट करें इत्यादि ।

Metaverse क्या है ?

Metaverse दो शब्द ‘meta’ और ‘verse’ से मिलकर बना है । ‘meta’ शब्द ग्रीक भाषा से लिया गया है , जिसका अर्थ है “परे” और ‘verse’ शब्द ‘universe’ शब्द से लिया गया है , जिसका मतलब “ब्रह्माण्ड” है । तो metaverse का मतलब होता है वो दुनिया जो इस ब्रह्माण्ड के परे है । इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिकन नॉवेलिस्ट “Neal Stephenson” में अपनी novel “Snow Crash” में किया था ।

आसान भाषा में कहे तो , metaverse एक वर्चुअल दुनिया है । इस दुनिया में आप अपने “avatar” की मदद से वो सब कर पाएंगे जो की आप असली दुनिया में करते है । उदाहरण के लिए इस दुनिया में आप अपने असली दोस्तों , रिश्तेरदारों इत्यादि से मिल पाएंगे । इसके साथ साथ आप इस दुनिया में अपना घर खरीद पाएंगे , पैसे कमा पाएंगे , दुनिया घूम पाएंगे इत्यादि ।

Metaverse कैसे काम करेगा ?

Metaverse में जाने के लिए आप सबसे पहले अपना “avatar” चुनेंगे । वो avatar आपकी तरह दिखेगा , मगर आप चाहे तो उसे अपने मन मुताबिक कस्टमाइज भी कर पाएंगे ।Metaverse को काम करने के लिए बहुत सी टेक्नोलॉजी की ज़रुरत पड़ेगी । क्यूंकि ये एक वर्चुअल दुनिया है , इसमें जाने के लिए आपको VR headset की ज़रुरत पड़ेगी । जिस पर कंपनियां काम कर रही है और उसे चश्मे जैसा बनाने की कोशिश कर रही है । इसके साथ इसमें “Augmented Reality” का इस्तेमाल किया जायेगा , ताकि रियल लाइफ को वर्चुअल लाइफ से जोड़ा जा सके । जैसे की ‘Pokemon Go’ नाम के गेम में होता है । इसमें प्राइवेसी को देखते हुए “Blockchain” टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जायेगा ।

क्यूंकि इस दुनिया में आप अपना घर खरीद पाएंगे और पैसे कमा पाएंगे । तो उसके लिए NFT (Non-Fungible Token) का इस्तेमाल किया जायेगा । तो आप NFT की मदद से चीज़े खरीद और बेच पाएंगे । इसके साथ इस दुनिया असली दुनिया जैसा एक्सपीरियंस देने की कोशिश करेगी , जिसके कारण 5G या 6G डाटा का इस्तेमाल किया जायेगा । ताकि जल्द से जल्द डाटा डाउनलोड और अपलोड हो सके । और आपके आस पास की चीज़े जल्द से जल्द लोड हो सके । फिर इस टेक्नोलॉजी को काम करने के लिए इसमें sensors का भी इस्तेमाल किया जायेगा । जिसे आपको ग्लव्स के साथ पहनना होगा , ताकि जो आपका avatar महसूस कर रहा है वो आप भी महसूस कर सके ।

Metaverse के रियल लाइफ उदाहरण ?

Metaverse पर अभी बहुत सारी कंपनियां काम कर रही है । इसे अभी पूरी तरह से आने में समय है । मगर अभी से काफी सारी जगह पर रियल लाइफ में मेटावर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है ।

  1. Metaverse की दुनिया में भारत की पहली शादी होने जा रही है । ये शादी तमिलनाडु के एक जोड़े की होगी , जिसमे लड़की के स्वर्गीय पिता भी शामिल होंगे । ये शादी “Hogwarts School” में होगी , ये एक काल्पनिक स्कूल है जिसमे काल्पनिक किरदार “Harry Potter” पढता है ।
  2. Metaverse की मदद से साल 2020 में साउथ कोरिया की एक लेडी मेटावर्स में अपनी बेटी से मिलती है । जिसकी असल ज़िन्दगी में 4 साल पहले 7 साल की उम्र में एक बीमारी से मृत्यु हो जाती है ।
  3. Barbados नामक देश अपनी देश की एम्बेसी को metaverse में खोलेंगे । जिसके लिए वो tech giants से बात भी कर रहे है । इसके साथ उन्होंने इसके लिए metaverse में ज़मीन भी खरीदी है ।

क्या Metaverse सेफ है ?

नहीं , मेटावर्स पूरी तरह से सेफ नहीं है । इसमें तो अभी से ही क्राइम होना शुरू हो गए है । उदाहरण के लिए कुछ समय पहले अमेरिका में एक लड़की metaverse में अपने avatar की मदद से अपना मनपसंद गेम खेल रही थी । तभी उस लड़की के अवतार का पीछा एक अनजान लड़के एक अवतार करने लगता है । कुछ समय के बाद उस लड़के का avatar उस लड़की के avatar के साथ बदसलूकी करने लगता है । जब लड़की इसका विरोध करती है , तो लड़का कहता है की “ये मेटावर्स है और मैं यहाँ जो चाहू वो कर सकता हूँ”।

वीमेन की सेफ्टी को लेकर ऐसा ही एक और मामला सामने आया है । 43 साल की महिला जिनका नाम “नीना जेन पटेल” है , उनके मेटावर्स ज्वाइन करने के 60 सेकंड के अन्दर ही उनके अवतार के साथ गेंगरेप होने लगता है । यह सब नीना पटेल को इतना असली लगता है , जिससे वो घबरा जाती है । इसके बाद वो तुरंत अपना वर्चुअल हेडसेट उतार देती है और उसे तोड़ देती है । इस हादसे के बाद से ही नीना जेन पटेल को anxiety अटैक हो रहे है । इस हादसे के बाद फिर से मेटावर्स की सेफ्टी पर सवाल उठ रहे है ।

मेटावर्स में avatar की सेफ्टी को लेकर , पिछले साल मार्च के महीने में meta executive “Andrew Bosworth”, जो की इस साल meta के CTO बनेगें । उन्होंने कहाँ था की metaverse में लोग क्या बोलते है और कैसे व्यवहार करते है , उसे कण्ट्रोल करना मुमकिन नहीं है । इसके साथ साथ metaverse बच्चों के लिए भी सेफ नहीं है , क्यूंकि बच्चे इससे ग्राफिकल सेक्सुअल कंटेंट के एक्सपोज़र में भी आते है ।

Metaverse में invest कैसे करें ?

Metaverse बिलकुल ही नया कांसेप्ट है , जिसके कारण लोग इसमें इन्वेस्ट करके आमिर बनना चाहते है । क्यूंकि metaverse अभी डेवेलोप हो रहा है , जिसके कारण अभी इसमें बहुत स्कोप है । मगर इसमें अभी आप डायरेक्ट इन्वेस्ट नहीं कर सकते है । इसमें अभी के लिए आप सिर्फ cryptocurrency की मदद से ही इन्वेस्ट कर सकते है । आप इसमें उन कंपनियों में निवेश कर सकते है , जो की metaverse की फील्ड में काम रही है । उदाहरण के लिए facebook , google , apple ,microsoft , Nvidea इत्यादि । इसके साथ आप मेटावर्स गेम में भी निवेश कर सकते है । जैसे की “The Sandbox” और “Decentraland” इत्यादि । Metaverse के शेयर वैल्यू इंडेक्स को metaverse index कहा जाता है ।

FAQ

Q. Facebook का नया नाम क्या है ?

Ans. Facebook ने अपना नाम बदल लिया है । अब facebook का नया नाम “META” है ।

Q. क्या हम metaverse में ज़मीन खरीद सकते है ?

Ans. हाँ , आप metaverse में ज़मीन भी खरीद सकते है । मगर आप ये सब सिर्फ डिजिटल करेंसी की मदद से कर पाएंगे ।

Q. क्या हम metaverse में पैसे कमा सकते है ?

Ans. हाँ , आप metaverse में पैसे भी कमा सकते है । ये पैसे आपको डिजिटल करेंसी के रूप में मिलेंगे ।

Q. क्या एक ही metaverse होगा ?

Ans. नहीं , एक से ज़्यादा metaverse होंगे । क्यूंकि इसमें बहुत सारी कंपनियां काम कर रही है और ये सभी अपना metaverse बना रही है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस नयी आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको काफी कुछ नया सीखने को मिला होगा । इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपके metaverse से जुड़े सभी सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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NFT क्या है और कैसे खरीदे | What is NFT and How to buy

दुनिया जैसे जैसे डिजिटाइजेशन की ओर बढ़ रही है , वैसे वैसे हमें नयी टेक्नोलॉजी देखने और सुनने को मिल रही है । ऐसी ही एक टेक्नोलॉजी NFT है , जिसका पिछले कुछ समय से मार्किट में नाम काफी चर्चा में है । इसका अंदाज़ा आप इस बात से ही लगा सकते है की गूगल के ग्लोबल डाटा के अनुसार , गूगल सर्च में NFT ने क्रिप्टोकोर्रेंसी को भी पछाड़ दिया है । इसके साथ ही पिछले कुछ समय से NFT का नाम भारतीय मार्किट में बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है । तो आज हम इस आर्टिकल की मदद से जानेगे की NFT क्या है , NFT काम कैसे करता है इत्यादि ।

NFT क्या होता है ?

NFT का पूरा नाम “Non-Fungible Token” है । NFTs वो टोकन होते है , जिसका इस्तेमाल हम किसी यूनिक चीज़ के ओनरशिप को दर्शाने के लिए करते है । यह एक ethereum blockchain पर बेस्ड टेक्नोलॉजी है । इसकी मदद से डिजिटल कंटेंट जैसे की videos , songs , image इत्यादि को खरीद या बेच सकते है ।

NFT काम कैसे करता है ?

NFT टेक्नोलॉजी ethereum blockchain पर बेस्ड एक टेक्नोलॉजी है । NFT का एक समय पर एक ही owner हो सकता है , जिसे unique id और metadata की मदद से मैनेज किया जाता है । जिसे कोई और टोकन रेप्लिकेट नहीं कर सकता है । Bitcoin और dogecoin क्रिप्टोकोर्रेंसी की तरह ही Ethereum भी एक cryptocurrency है । उदाहरण के लिए दो लोग आपस में 200 ₹ नोट एक्सचेंज कर सकते है , जिससे कोई फड़क नहीं पड़ेगा । मगर अगर किसी के पास कोई डिजिटल कंटेंट है NFT के रूप में तो वो बिलकुल यूनिक होगा । क्यूंकि उस डिजिटल कंटेंट की कॉपी तो हो सकती है , मगर उस NFT की नहीं । क्यूंकि उस NFT में उस डिजिटल कंटेंट के ओनर और सेलर की जानकारी होगी , जिससे ओरिजिनल कंटेंट को आसानी से पहचाना जा सकता है ।

NFT कैसे ख़रीदे : Step by Step guide ?

NFT खरीदने के लिए नीचे दिए गए सभी स्टेप्स को फॉलो करें :

  1. सबसे पहले अपने पसंद अनुसार NFT marketplace चुन ले । उदाहरण के लिए OpenSea , Rarible इत्यादि ।
  2. अब आप इनमें किसी एक platform पर अपने आप को register कर लें ।
  3. इसके बाद आप अपने wallet को कनेक्ट कर लें , इसके लिए बहुत सारे प्लेटफार्म पर “Connect Wallet” नाम का एक आसान ऑप्शन भी मिलता है ।
  4. फिर आप अपने पसंद अनुसार NFT के auction में भाग लें । यदि आप उस auction में जीत जाते है , तो वो NFT आपका हो जायेगा ।

अपना NFT कैसे क्रिएट करें : Step by step guide ?

अगर आप भी NFT से पैसे कमाना चाहते है , तो आप भी अपना NFT बनाकर बेच सकते है । NFT बनाने के लिए आप निचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें :

  1. सबसे पहले अपने पसंद अनुसार NFT marketplace चुन ले । उदाहरण के लिए OpenSea , Rarible इत्यादि ।
  2. अब आप इनमें किसी एक platform पर अपने आप को register कर लें ।
  3. इसके बाद आप अपने wallet को कनेक्ट कर लें , इसके लिए बहुत सारे प्लेटफार्म पर “Connect Wallet” नाम का ऑप्शन भी मिलता है ।
  4. इसके बाद आप टॉप राइट साइड में “create” के ऑप्शन को सेलेक्ट करें , फिर आप अपना NFT बना लें ।
  5. अब आप अपने NFT को अपने price अनुसार लिस्ट कर दें ।

FAQ

Q. NFT का फुल फॉर्म क्या है ?

Ans. NFT का फुल फॉर्म “Non-Fungible Token” होता है । ये एक blockchain बेस्ड टेक्नोलॉजी है , जो की Ethereum crypto पर बेस्ड है ।

Q. सबसे बड़ा NFT प्लेटफार्म कौन सा है ?

Ans. अभी के समय सबसे बड़ा NFT प्लेटफार्म OpenSea है , जिस पर जाकर आप NFT खरीद या बेच सकते है । मगर इसके अलावा भी बहुत सारे NFT प्लेटफार्म है , जैसे की Rarible , SuperRare इत्यादि ।

Q. क्या हम अपना खुद का NFT बना सकते है ?

Ans. जी हाँ , आप अपना खुद NFT बना सकते है और उसे बेच भी सकते है ।

मैं आशा करता हूँ , की इस आर्टिकल से आपको NFT के बारें में काफी कुछ सीखने को मिला होगा । इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपके NFT से जुड़े काफी सारे सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे । यदि फिर भी आपके मन में कोई सवाल या सुझाव रहता है , तो आप हमें नीचे कमेंट करके बता सकते है ।

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